नेहरू
कवि: कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा
कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

कवि: कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा
कवि: मनीष कुमार यादव
खुद को गुवेरा, मुक्तिबोध, मार्क्स और विद्रोही की कड़ी का हिस्सा मानने वाले ये दोस्त चाहते हैं दूर रखना अपनी ज़िन्दगी को विचारधारा और आन्दोलन के साए से भी
कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा
कवि: अदम गोंडवी
सदन को घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे अगली योजना में घूसख़ोरी आम कर देंगे
कैफ़ी आज़मी (1919–2002) हिंदी और उर्दू साहित्य के एक अत्यंत प्रतिष्ठित प्रगतिशील कवि और गीतकार थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक चेतना, रूमानियत और क्रांतिकारी विचारों का अनूठा समन्वय किया। 'आवारा सज्दे' उनका कालजयी काव्य-संग्रह है।
समकालीन हिंदी कवयित्री, आधुनिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं के लिए चर्चित।
अदम गोंडवी (1947–2011) जनपक्षधरता, क्रांतिकारी चेतना और तीखे राजनीतिक व्यंग्य के बेबाक कवि थे। उन्होंने अपनी ग़ज़लों और कविताओं के माध्यम से हाशिए के समाज की आवाज़ को बुलंद किया और व्यवस्था की विसंगतियों पर कड़ा प्रहार किया।
कुंवर नारायण (1927–2017) आधुनिक हिंदी साहित्य के मूर्धन्य कवि और विचारक थे। उनकी काव्य-दृष्टि में इतिहास, मिथक और समकालीन मानवीय नियति का गहरा दार्शनिक समन्वय मिलता है।
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अंतिम तिथि: 6 सितंबर 2026