नेहरू
कवि: कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
कविताएँ
कवि: कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा
किताबें

लेखक: कैफ़ी आज़मी
लोकभारती प्रकाशन - 2008 - हिन्दी
'आवारा सज्दे' कैफ़ी आज़मी का प्रसिद्ध काव्य-संग्रह है, जो उनकी प्रगतिशील विचारधारा, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है। इसमें उनकी चुनिंदा नज़्में और ग़ज़लें संकलित हैं।