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नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

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कविता अभिलेख की संपादकीय पाठ-यात्राएँ।

ये संग्रह संपादकीय विवेक से बनाए गए हैं। मनःस्थिति, स्मृति, कवि, समय या साहित्यिक संदर्भ के रास्ते अभिलेख में प्रवेश करें।

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आशा की कविताएँ

जीजिविषा, कोमलता और थोड़ी-सी रोशनी खोजते पाठकों के लिए।

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शोक के समय की कविताएँ

हानि, स्मृति, एकांत और मन को संभालने की एक संवेदनशील पाठ-यात्रा।

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प्रतिरोध के स्वर

गरिमा, विरोध, स्वतंत्रता और बोलने के साहस से जुड़ी कविताएँ।

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पहली बार अभिलेख में आने वाले पाठकों के लिए एक सहज शुरुआत।

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