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आशा की कविताएँ
जीजिविषा, कोमलता और थोड़ी-सी रोशनी खोजते पाठकों के लिए।
कविताएँ पढ़ेंकैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

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हानि, स्मृति, एकांत और मन को संभालने की एक संवेदनशील पाठ-यात्रा।
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गरिमा, विरोध, स्वतंत्रता और बोलने के साहस से जुड़ी कविताएँ।
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पहली बार अभिलेख में आने वाले पाठकों के लिए एक सहज शुरुआत।
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