एक कविता दोस्ती पर
कवि: मनीष कुमार यादव
खुद को गुवेरा, मुक्तिबोध, मार्क्स और विद्रोही की कड़ी का हिस्सा मानने वाले ये दोस्त चाहते हैं दूर रखना अपनी ज़िन्दगी को विचारधारा और आन्दोलन के साए से भी
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

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कवि: मनीष कुमार यादव
खुद को गुवेरा, मुक्तिबोध, मार्क्स और विद्रोही की कड़ी का हिस्सा मानने वाले ये दोस्त चाहते हैं दूर रखना अपनी ज़िन्दगी को विचारधारा और आन्दोलन के साए से भी
कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा
मैं भी मरूंगा और भारत के भाग्य विधाता भी मरेंगे लेकिन मैं चाहता हूं कि पहले जन-गण-मन अधिनायक मरें