मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
सभी सूचनाएँ

नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

जसिंता केरकेटा
← कवियों की सूची पर लौटें

परिचय

जसिंता केरकेटा

1983–पश्चिम सिंहभूम, झारखण्ड, भारत

जसिंता केरकेटा झारखण्ड के पश्चिम सिंहभूम ज़िले से ताल्लुक रखने वाली प्रमुख हिंदी कवयित्री, लेखिका और स्वतंत्र पत्रकार हैं। अपनी रचनाओं में वे आदिवासी समाज की जिजीविषा, जल-जंगल-ज़मीन के अधिकारों और मानवीय संवेदनाओं को मुखरता से अभिव्यक्ति देती हैं।

कविताएँ

जसिंता केरकेटा की कविताएँ

राजनीति की सड़क पर

कवि: जसिंता केरकेटा

अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा

किताबें

जसिंता केरकेटा की किताबें

ईश्वर और बाज़ार

ईश्वर और बाज़ार

लेखक: जसिंता केरकेटा

राजकमल प्रकाशन - 2022 - हिन्दी

'ईश्वर और बाज़ार' जसिंता केरकेटा का चर्चित काव्य-संग्रह है, जो वर्ष 2022 में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हुआ। इस संग्रह की कविताएँ समकालीन सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ, जल-जंगल-ज़मीन से जुड़े सरोकारों और बाज़ारीकरण के दौर में मानवीय संवेदनाओं को मुखरित करती हैं।