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नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

रमाशंकर यादव 'विद्रोही'
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परिचय

रमाशंकर यादव 'विद्रोही'

1957–2015Sulatanpur, Uttar Pradesh, India

रमाशंकर यादव 'विद्रोही' हिन्दी साहित्य के प्रमुख जनवादी कवि थे। उनकी कविताएँ आम जनता के संघर्ष, सामाजिक न्याय, चेतना और प्रतिरोध की भावना को प्रखरता से अभिव्यक्ति देती हैं।

कविताएँ

रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की कविताएँ

किताबें

रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की किताबें

नयी खेती

नयी खेती

लेखक: रमाशंकर यादव 'विद्रोही'

नवारुण - 2018 - हिन्दी

'नयी खेती' प्रख्यात जनकवि रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की चर्चित कविताओं का संग्रह है। इस काव्य-संग्रह की रचनाएँ आम जनमानस के संघर्ष, सामाजिक चेतना, समानता और प्रतिरोध के स्वर को बेहद प्रखरता के साथ अभिव्यक्त करती हैं।