मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
सभी सूचनाएँ

नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

← कविताओं पर लौटें

नीलाम कर देंगे

कवि: अदम गोंडवी

सदन को घूस देकर

बच गई कुर्सी तो देखोगे

अगली योजना में

घूसख़ोरी आम कर देंगे

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे

कमीशन दो तो हिंदुस्तान को नीलाम कर देंगे

सुरा व सुंदरी के शौक़ में डूबे हुए रहबर

दिल्ली को रंगीलेशाह का हम्माम कर देंगे

ये वंदेमातरम् का गीत गाते हैं सुबह उठकर

मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे

सदन को घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे

अगली योजना में घूसख़ोरी आम कर देंगे

कविता साझा करें