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बोझ से अपने उस की कमर झुक गई
क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा
ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो
ज़िंदगी का हो कोई जिहाद
वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद
सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा
जनकवि अदम गोंडवी का काव्य-संग्रह 'समय से मुठभेड़' समकालीन सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों और हाशिए के समाज के संघर्षों को प्रखरता से रेखांकित करता है। वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस संग्रह में 'नीलाम कर देंगे' और 'शायर की ज़ुबानी' जैसी उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ शामिल हैं, जो व्यवस्था के दोहरे चरित्र पर तीखा प्रहार करती हैं। अदम जी की शायरी जन-सरोकारों और बेबाक बयानी का जीवंत दस्तावेज़ है।