सीरिया के मुसलमान बच्चे
कवि: विहाग वैभव
अल्लाह के बाग़ान में जिन्हें उधम कर दौड़ जाना था अगले आँगन वे बम से फटी सड़क पर गला फाड़ रोते हुए अपनी माँ के चिथे स्तन चूम रहे हैं
कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

कविताएँ
कवि: विहाग वैभव
अल्लाह के बाग़ान में जिन्हें उधम कर दौड़ जाना था अगले आँगन वे बम से फटी सड़क पर गला फाड़ रोते हुए अपनी माँ के चिथे स्तन चूम रहे हैं
कवि: विहाग वैभव
प्रिय आयोजक! उपकृत कर देने के दंभ से लबालब आपका कविता पाठ का निमंत्रण मिला शुक्रिया, पर क्षमा करें नहीं आ सकूँगा, अक्षम हूँ
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