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नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

काव्य-विधाएँ

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समकालीन कविता विधा की कविताएँ

समकालीन कविता विधा में प्रकाशित हिंदी और उर्दू रचनाएँ कविताबोल पर पढ़ें।

राजनीति की सड़क पर

कवि: जसिंता केरकेटा

अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा