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सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'

1936–1975Khevali, Varanasi, India
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' (1936–1975) साठोत्तरी हिंदी कविता के अत्यंत सशक्त और जनपक्षधर कवि थे। अपनी तीखी राजनीतिक चेतना और बेबाक शैली के लिए विख्यात धूमिल ने 'संसद से सड़क तक' जैसे संग्रहों के माध्यम से समकालीन समाज और राजनीति के अंतर्विरोधों पर गहरा प्रहार किया। उन्हें मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

केदारनाथ अग्रवाल

प्रगतिशील काव्य-धारा के प्रमुख कवि केदारनाथ अग्रवाल (1911–2000) अपनी यथार्थवादी और जनसरोकार से जुड़ी कविताओं के लिए जाने जाते हैं। पेशे से वकील रहे केदारनाथ जी की रचनाओं में प्रकृति-प्रेम और शोषित वर्ग के प्रति गहरी सहानुभूति दिखाई देती है। उन्हें 'केन का कवि' भी कहा जाता है।

कैफ़ी आज़मी (1919–2002) हिंदी और उर्दू साहित्य के एक अत्यंत प्रतिष्ठित प्रगतिशील कवि और गीतकार थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक चेतना, रूमानियत और क्रांतिकारी विचारों का अनूठा समन्वय किया। 'आवारा सज्दे' उनका कालजयी काव्य-संग्रह है।