बीस साल बाद
मगर यह वक़्त घबराए हुए लोगों की शर्म आँकने का नहीं और न यह पूछने का— कि संत और सिपाही में देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य कौन है!
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

परिचय
कविताएँ
मगर यह वक़्त घबराए हुए लोगों की शर्म आँकने का नहीं और न यह पूछने का— कि संत और सिपाही में देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य कौन है!
वहाँ न जंगल है न जनतंत्र भाषा और गूँगेपन के बीच कोई दूरी नहीं है। एक ठंडी और गाँठदार अंगुली माथा टटोलती है। सोच में डूबे हुए चेहरों और वहां दरकी हुई ज़मीन में कोई फ़र्क नहीं हैं।
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है
किताबें

लेखक: सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
राजकमल प्रकाशन - 2006 - हिन्दी
'संसद से सड़क तक' सुदामा पाण्डेय 'धूमिल' का अत्यंत चर्चित काव्य-संग्रह है। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस संग्रह में समकालीन राजनीतिक यथार्थ, सामाजिक विसंगतियों और आम जन के प्रतिरोध का प्रखर स्वर मिलता है। इसमें 'बीस साल बाद' और 'शहर में सूर्यास्त' जैसी प्रसिद्ध कविताएँ संकलित हैं।