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नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

सुमित्रानंदन पंत
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परिचय

सुमित्रानंदन पंत

1900–1977कौसानी, उत्तराखंड, भारत

सुमित्रानंदन पंत आधुनिक हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनकी कविताएं प्रकृति-सौंदर्य, सुकुमार भावनाओं और दार्शनिक चेतना से समृद्ध हैं। 'मानव' और 'यह धरती कितना देती है' जैसी कालजयी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने हिंदी काव्य-परंपरा को एक नया सौंदर्यशास्त्र प्रदान किया।

कविताएँ

सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ

यह धरती कितना देती है

कवि: सुमित्रानंदन पंत

मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे, सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ उगेंगे, रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी और फूल फलकर मै मोटा सेठ बनूँगा! पर बंजर धरती में एक न अंकुर फूटा, बन्ध्या मिट्टी नें न एक भी पैसा उगला!- सपने ज...

मानव

कवि: सुमित्रानंदन पंत

सुन्दर हैं विहग, सुमन सुन्दर, मानव! तुम सबसे सुन्दरतम, निर्मित सबकी तिल-सुषमा से तुम निखिल सृष्टि में चिर निरुपम! यौवन-ज्वाला से वेष्टित तन, मृदु-त्वच, सौन्दर्य-प्ररोह अंग, न्योछावर जिन पर निखिल प्रकृति, छाया-प्रकाश के र...

किताबें

सुमित्रानंदन पंत की किताबें

अभी कोई किताब सूचीबद्ध नहीं है

इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।