बर्बरता की ढाल ठाकरे
कवि: नागार्जुन
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! कैसे फ़ासिस्टी प्रभुओं की -- गला रहा है दाल ठाकरे ! अबे सँभल जा, वो पहुँचा बाल ठाकरे !
कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

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चुना हुआ पाठ
कवि: नागार्जुन
बाल ठाकरे ! बाल ठाकरे ! कैसे फ़ासिस्टी प्रभुओं की -- गला रहा है दाल ठाकरे ! अबे सँभल जा, वो पहुँचा बाल ठाकरे !