राजनीति की सड़क पर
कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा
कैफ़ी आज़मी
बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

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कवि: जसिंता केरकेटा
अब यह लिंग धीरे-धीरे बन्दूक में तब्दील हो रहा है इसके ज़रिए एक साथ किसी ख़ास समुदाय का बलात्कार किया जाएगा