Kavitabol
Poetry, for Life
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है
इस कवि से जुड़ी कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।