मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
सभी सूचनाएँ

नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
← कवियों की सूची पर लौटें

परिचय

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

1927–1983Basti, Uttar Pradesh, India

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हिंदी साहित्य के 'नई कविता' दौर के प्रमुख कवि, गद्यकार और नाटककार हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, आम जनजीवन का संघर्ष और सहज-सरल काव्यात्मक भाषा की गहरी छाप दिखाई देती है।

कविताएँ

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविताएँ

देश काग़ज़ पर बना नक़्शा नहीं होता

कवि: सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो? यदि हाँ तो मुझे तुम से कुछ नहीं कहना है।

देशगान

कवि: सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है। बिन अदालत औ मुवक्किल के मुकदमा पेश है। आँख में दरिया है सबके दिल में है सबके पहाड़ आदमी भूगोल है जी चाहा नक्शा पेश है। क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।

किताबें

सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की किताबें

अभी कोई किताब सूचीबद्ध नहीं है

इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।