मुख्य सामग्री पर जाएँ
महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ
आप कविताबोल की नई वेबसाईट का BETA संस्करण देख रहे हैं। इस्तेमाल के दौरान प्रकाशित सामग्री में कुछ त्रुटियाँ अथवा उपलब्ध सुविधाओं में असंगतियां हो सकती हैं। अपने सुझाव हमें भेजने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
सभी सूचनाएँ

नेहरू

कैफ़ी आज़मी

बोझ से अपने उस की कमर झुक गई क़द मगर और कुछ और बढ़ता रहा ख़ैर-ओ-शर की कोई जंग हो ज़िंदगी का हो कोई जिहाद वो हमेशा हुआ सब से पहले शहीद सब से पहले वो सूली पे चढ़ता रहा

पराग पावन
← कवियों की सूची पर लौटें

परिचय

पराग पावन

1994–Jaunpur, Uttar Pradesh, India

पराग पावन समकालीन हिंदी साहित्य के कवि हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार और आधुनिक जीवन के यथार्थ की स्पष्ट अभिव्यक्ति मिलती है। 'बेरोज़गार' उनकी प्रमुख कविताओं में से एक है।

कविताएँ

पराग पावन की कविताएँ

बेरोज़गार

कवि: पराग पावन

वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?

किताबें

पराग पावन की किताबें

अभी कोई किताब सूचीबद्ध नहीं है

इस कवि की कोई किताब अभी अभिलेख में उपलब्ध नहीं है।