राह तो एक थी
कवि: शमशेर बहादुर सिंह
राह तो एक थी हम दोनों की आप किधर से आए गए हम जो लुट गए पिट गए, आप तो राजभवन में पाए गए
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

कविताएँ
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शमशेर बहादुर सिंह की प्रकाशित कविताओं की एक केंद्रित पाठ-यात्रा।
कवि अभिलेख
कवि: शमशेर बहादुर सिंह
राह तो एक थी हम दोनों की आप किधर से आए गए हम जो लुट गए पिट गए, आप तो राजभवन में पाए गए