बेरोज़गार
कवि: पराग पावन
वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

कविताएँ
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पराग पावन की प्रकाशित कविताओं की एक केंद्रित पाठ-यात्रा।
कवि अभिलेख
कवि: पराग पावन
वे स्त्रियाँ याद आती हैं जो निमंत्रण की तरह आयी थीं और त्यौहारों की तरह चली गयीं जिनकी आवाज़ में कास के फूल झूमते थे?