कविताएँ
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सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

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Manish Kumar Yadav विषय से जुड़ी प्रकाशित कविताओं की केंद्रित पाठ-यात्रा।
चुना हुआ पाठ
कवि: मनीष कुमार यादव
एक समय था सृष्टि में हर ओर शबनम व्याप्त थी भगवान और अल्लाह नहीं थे तब भी वहाँ पर्याप्त थी उसके होने से ही तो पहले वहाँ इंसान आए फिर ख़ुदा-भगवान आए और फिर झगड़े हुए पिछलों से भी तगड़े हुए