जलियाँवाला बाग़ में वसंत
कवि: सुभद्राकुमारी चौहान
परिमल-हीन पराग दाग़-सा बना पड़ा है हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है
सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
उन्होंने जनता और ज़रायमपेशा औरतों के बीच की सरल रेखा को काटकर स्वास्तिक चिन्ह बना लिया है

कविताएँ
कविताएँ उपलब्ध की जा रही हैं...
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम विषय से जुड़ी प्रकाशित कविताओं की केंद्रित पाठ-यात्रा।
चुना हुआ पाठ
कवि: सुभद्राकुमारी चौहान
परिमल-हीन पराग दाग़-सा बना पड़ा है हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है